
आज की हमारी चर्चा का केंद्र चित्रा नक्षत्र है। यह आकाश मण्डल में मौजूद चौदहवां नक्षत्र है जो १७३.२० डिग्री से लेकर १८६.४० डिग्री तक गति करता है। हस्तनक्षत्र के स्वामी मंगल, नक्षत्र देव विश्वकर्मा और राशि स्वामी बुद्ध तथा शुक्रदेव हैं। यदि आपके कोई सवाल हैं अथवा आप हमें कोई सुझाव देना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट पर विज़िट कर सकते हैं। आपके प्रश्नों के यथा संभव समाधान के लिए हम वचन बद्ध हैं।
चित्रा नक्षत्र वैदिक ज्योतिष में
चित्रा नक्षत्र आकाश मण्डल में मौजूद एक चमकता हुआ सितारा है। इसका प्रतीक चिन्ह चमकता हुआ मोती है। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं और यह नक्षत्र कन्या राशि २३.२० डिग्री से तुला राशि में ६.४० डिग्री तक गति करता है। इस नक्षत्र के देवता चित्र गुप्त हैं। चित्रा नक्षत्र के जातकों के जीवन पर मंगल, बुद्ध व्शुक्र देव का प्रत्यक्ष प्रभाव देखा जा सकता है।
नक्षत्र स्वामी : मंगल
नक्षत्र देव : चित्रगुप्त
राशि स्वामी : बुद्ध ( प्रारंभिकदोचरण ), शुक्र ( अंतिमदोचरण )
विंशोत्तरी दशा स्वामी : मंगल
चरण अक्षर : पे, पो, रा, रि
वर्ण : वैश्य
गण : राक्षस
योनि : व्याघ्र
नाड़ी : अन्त्य
पक्षी : बगुला
तत्व : अग्नि
प्रथम चरण : सूर्य
द्वितीय चरण : बुद्ध
तृतीय चरण : शुक्र
चतुर्थ चरण : मंगल
वृक्ष : बेल का पेड़
बीज मंत्र : ॐ तं अथवा ॐ थं
चित्रा नक्षत्र जातक की कुछ विशेषताएं व्जीवन
इस नक्षत्र के जातक पतले, सुन्दर आँखों वाले, आकर्षक, महत्वकांक्षी और संवेदनशील तथा भावुक होते हैं। आपमें गजब की ऊर्जा होती है और आप निरंतर कार्यरत रहते हैं। आप अत्याधिक परिश्रमी होते हैं, अपने मन की सुनते हैं और जीवन में आने वाली मुश्किलों को पार कर सफल होते हैं। ऐसे जातकों में फोर्थ श्रेणी के लोगों की ओर विशेष लगाव होता है। आप गरीबों की मदद करने वाले होते हैं। ३२ वर्ष तक का कार्यकाल थोड़ा स्ट्रगलिंग परन्तु जीवन के बत्तीसवें वर्ष के बाद उन्नति करते हैं। आप बहुत अधिक इमोशनल भी होते हैं जिस वजह से आपको निर्णय लेने में कठिनाई आती है। क्यूंकि आप अपने दिल की सुनते हैं इसलिए आप की रुचि व्यापार में अधिक होती है।
चित्रा नक्षत्र में जन्मी जातिकाएँ बहुत सुन्दर व्प्रसन्नचित्त होती हैं। इनका स्वभाव हंसमुख होता है। इनकी आँखें बहुत सुन्दर व् आकर्षक होती हैं। आप ईश्वर भक्त व् अपने माता पिता की चहेती होती हैं। हाथ में लिए काम को अधूरा छोड़ देना आपका नकारात्मक पक्ष है।
चित्रा नक्षत्र के जातक/ जातिका की मैरिडलाइफ
इस नक्षत्र में जन्मे जातकों की मैरिडलाइफ में उतार चढ़ाव बने रहते हैं फिर भी वैवाहिक जीवन में स्थिरता बानी रहती है। चित्रा नक्षत्र की जातिकाओं के विवाह से पूर्व किसी विद्वान से कुंडली मिलान आवश्य करवाएं
अल्सर, किडनी सम्बंधित रोग, दिमागी बुखार, अपेंडिक्स की संभावना अक्सर रहती है। रोजा ना बीज मन्त्र का १०८ बार उच्चारण करें आपकी रोग प्रतिकारक क्षमता में वृद्धि होती है, मान सिकतनाव दूर होता है, सफलता मिलने में सहायता प्राप्त होती है।
चित्रा नक्षत्र जातक शिक्षा व्व्यवसाय
ऐसे जातक डिफेन्स सर्विसेज (पुलिस, आर्मी) में उच्चपदासीन हो सकते हैं। प्राइवेट प्रोफेशन में जा सकते हैं जैसे सी.ए अथवा एडवोकेट हो सकते हैं और यदि मंगल शुभ हो और उच्च के राहु के साथ शुभ स्थान में युति बनाये तो राजनेता होने की संभावना भी बनती है।
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