
केतु का असर ज्योतिष के दृष्टिकोण से काफी शुष्क माना गया है, जिसका अर्थ हुआ की ये ग्रह अपने प्रभाव द्वारा जीवन में कठोरता एवं वास्तविकता से रुबरु कराने वाला होता है. केतु की राशि और उसके ग्रहों के साथ युति दृष्टि योग पर फल निर्भर करता है. जन्म कुंडली में केतु के लिए सभी भावों पर असर अलग-अलग तरह से देखने को मिलता है. अगर कुंडली में अच्छी स्थिति में है तो बेहतर निर्णय लेने की क्षमता के साथ अंतर्ज्ञानी और दूरदर्शी बनाता है, लेकिन अगर कमजोर खराब स्थिति में है तो इन परिणामों को उलट कर देता है और जीवन में असंतोष बहुत अधिक भर जाता है. यदि केतु नकारात्मक है, तो जीवनसाथी के साथ अनबन का अनुभव हो सकता है. स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे, दुर्घटनाएं, वित्तीय नुकसान, नौकरी की स्थिरता के मुद्दे और व्यापार का नुकसान परेशान कर सकता है. उसे सामान्य शिक्षा प्राप्त करना भी बहुत कठिन लगता है.
केतु 12 घरों को कैसे प्रभावित करता है? :
प्रथम भाव में केतु :
प्रथम भाव में केतु का होना व्यक्ति को क्रियशील एवं गतिशील बनाता है. व्यक्ति को भ्रमण का शौक हो सकता है वह अकेलेपन को स्वीकार करने वाला होता है. केतु शुभ दृष्टि वाला हो तो व्यक्ति को मेहनती और भाग्यवान बनाता है. पीड़ित होने पर, व्यक्ति की सहनशक्ति कमजोर होती है सेहत से जुड़े मुद्दे परेशान कर सकते हैं. व्यक्ति लोभी भ्रामक एवं आत्म-केन्द्रित हो सकता है.
दूसरे भाव में केतु :
दूसरे भाव में केतु का होना व्यक्ति को अत्यधिक विचारशील बना सकता है. नवीन ज्ञान और जानकारी पाने के लिए वह आगे रहता है बोल चाल में कई बार अति-अभिव्यंजक हो सकता है. अगर केतु पीड़ित है, तो यह सीखने की क्षमता को कमजोर कर सकता है. परिवार से अलग होना पड़ सकता है. लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है.
तीसरे भाव में केतु :
तीसरे घर में केतु के शुभ होने पर व्यक्ति प्रसिद्ध, धनवान और यशस्वी बनता है. आध्यात्मिक रूप से प्रसिद्धि भी पाता है. व्यक्ति कि धार्मिक गतिविधियों में भागीदारी रहती है. केतु के खराब होने पर भाई-बहनों के साथ मुकदमेबाजी में फंसे सकता है, अपनों एवं लोगों के साथ शत्रुता का सामना करना पड़ सकता है.
चौथे भाव में केतु :
चौथे भाव में केतु के शुभ होने पर व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं निवास का अवसर मिलता है. माता के साथ संबंध अनुकूल रहता है. केतु के खराब होने पर परिवार से विच्छोह या दूरी झेलनी पड़ सकती है. मन अस्थिर और अशांत रहता है. परिवार एवं संपत्ति के मामले निराशा रह सकती है.
पंचम भाव में केतु :
पंचम भाव में केतु का होना व्यक्ति को कई गुढ़ विद्याओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है. शोध करने की तीव्र प्रवृत्ति देता है. केतु के खराब होने पर व्यक्ति गलत चीजों की ओर अधिक आकर्षित होता है. बौद्धिकता प्रभवैत होती है. गर्भपात या संतान से संबंधित चिंता भी अधिक रह सकती है.
छठे भाव में केतु :
छठे भाव केतु का होना कई सकारात्मक असर दिखाता है ये लेकिन दुर्घटना और चोट लगने का भय भी देता है. केतु का प्रभाव बहुत सी बाधाओं का सामना करने की हिम्मत देता है. व्यक्ति अपने कठिन प्रयासों से हर बार ऊपर उठता चला जाता है. जन्म कुंडली में केतु के खराब होने पर व्यक्ति नशे या अपराध में लिप्त हो सकता है.
सातवें भाव में केतु :
केतु का सातवें भाव में होना शादी और पार्टनरशिप के लिए परेशानियों को अधिक दिखाता है. जीवन में संबंधों को लेकर बाधाओं की स्थिति बनी रह सकती है. स्वास्थ्य संबंधी कुछ कष्टों के कारण वैवाहिक जीवन भी कष्टमय हो सकता है. जीवन में बार-बार संघर्ष, अलगाव और दो विवाह होने की संभावनाएं भी अधिक रह सकती है.
आठवें भाव में केतु :
केतु के आठवें भाव में होने पर व्यक्ति को धन के मामलों में बाधाओं का सामना करना पड़ता है, दुर्भाग्य और दुख का सामना करना पड़ता है. गुढ़ विद्याओं में भाग्यशाली हो सकता है. वह एक सक्षम ज्योतिषी भी हो सकता है. केतु का खराब होना हथियारों, जानवरों आदि से घायल होने का भय देता है. किसी बीमारी या चोट के कारण ऑपरेशन इत्यादि का सामना करना पड़ सकता है.
नवम भाव में केतु :
नवम भाव में केतु का होना व्यक्ति की इच्छा शक्ति को बढ़ाने वाला होता है. आध्यात्मिक रूप से विकसित होता है. तीर्थस्थलों की यात्रा करने का सुख पाता है. केतु के खराब होने पर यह स्थिति व्यक्ति के पिता के स्वास्थ्य को नुकसान पहुचा सकती है. अथवा पिता के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध कमजोर रह सकते हैं.
दशम भाव में केतु :
दशम भाव में केतु के होने पर व्यक्ति प्रसिद्धि और वैभव को प्राप्त करता है. वह एक शक्तिशाली स्थिति, सामाजिक प्रतिष्ठा और धन प्राप्त करने में सक्षम होता है. वह अपने ज्ञान एवं जानकारियों के लिए प्रसिद्ध होता है. केतु के खराब होने पर सहकर्मियों से असहयोग वं जीवन के प्रति निराशावादी प्रवृत्ति अधिक देखने को मिल सकती है.
ग्यारहवें भाव में केतु :
केतु ग्यारहवें भाव में होने के कारण आय के अतिरिक्त स्रोत प्राप्त होते हैं. व्यक्ति आशावादी बनाता है. धार्मिक प्रवृत्ति से जुड़ाव रखता है. दया और परोपकार से जुड़े कामों में शामिल होता हैं. और काम करने की अपनी अटूट क्षमता के कारण बहुत प्रसिद्ध होता है. चुनौतीपूर्ण स्थिति को संभालने में सक्षम होता है.
बारहवें भाव में केतु :
द्वादश भाव में केतु का होना व्यक्ति आध्यात्मिक प्रवृत्ति वाला और अंतर्मुखी बनाता है. व्यक्ति एकांत की ओर प्रवृत्त हो सकता है. आध्यात्मिक क्षेत्र में वह तंत्र ज्ञान, ज्योतिष जैसे विषयों को जान पाता है. विदेश में यात्रा या निवास पाता है.
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