जानिए केतु रत्न लहसुनिया के बारे में
वैदिक ज्योतिष में केतु को एक छायागृह के रूप में जाना जाता है। इन्हें दुसरे और आठवें भाव का कारकत्व प्राप्त होता है। केतु महादशा सात वर्ष की होती है। आज हम के माध्यम से आपसे सांझा करने जा रहे हैं की मोक्ष के कारक कहे जाने वाले केतु की महा दशा में हमें किस … Read more