सौरमण्डल में ग्रह चलते कैसे हैं? जानिए ज्योतिष की ज़बान मे
सौरमण्डल और ग्रहों की ज्योतिषीय अवस्थाएँ ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के विभिन्न अवस्थाओं — जैसे वक्री, मार्गी, अतिचारी, मंदगामी, अस्त, स्तंभित — का विश्लेषण अत्यंत आवश्यक है। आइए इन शब्दों का अर्थ विस्तार से समझें: 1. वक्री ग्रह: जब कोई ग्रह सूर्य से पाँचवें से नवम भाव तक गोचर करता है, तब वह वक्री अवस्था … Read more