
ॐ नमो विघ्नराजाय सर्वसौख्याप्रदयिने।
द्रष्टारिष्टविनाशाय पराय परमात्मने ॥
लम्बोदरं महावीर्य नाग्यग्योपशोभितम।
अर्ध्चन्द्रधरम देव विघ्न व्यूह विनाशनम॥
ॐ ह्रां, ह्रीं, ह्रूं ह्रे ह्रौं ह्रं : हेरम्बाय नमो नमः।
सर्व्सिद्धिप्रदोसि त्वं सिद्धिबुद्धि प्रदो भव ॥
चिन्तितार्थ्प्रदस्तव हि, सततं मोदकप्रिय : ।
सिंदुरारून वस्त्रेस्च पूजितो वरदायकः ॥
इदं गणपति स्तोत्रं यः पठेद भक्तिमान नरः ।
तस्य देहं च गेहं च स्वयं लक्ष्मिर्ण मुंचति ॥
इस स्तोत्र का दीपावली की रात्रि में १०८ बार पाठ कर सिद्ध कर ले,
तत्पश्चात प्रत्येक दिन प्रातः काल इस स्तोत्र का पाठ करे।
इस स्तोत्र का पाठ करने से घर में धन धान्य की वृद्धि होती है।
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