16 पौराणिक कथाएं पिता के वीर्य और माता के गर्भ के बिना जन्मे पौराणिक पात्रों की

हमारे हिन्दू धर्म ग्रंथो वाल्मीकि रामायण, महाभारत आदि में कई ऐसे पात्रों का वर्णन है जिनका जन्म बिना माँ के गर्भ और पिता के वीर्य के हुआ था। यहां हम आपको 16 ऐसे ही पौराणिक पात्रो क़े ज़न्म की कहानी बतायेँगे। इनमे से कई पात्रो के ज़न्म मे माँ के गर्भ का कोई … Read more

इस कारण देवर्षि नारद को बनना पड़ा था एक बार बंदर !

श्री नारद बड़े ही तपस्वी और ज्ञानी ऋषि हुए जिनके ज्ञान और तप की माता पार्वती भी प्रशंसक थीं। तब ही एक दिन माता पार्वती श्री शिव से नारद मुनि के ज्ञान की तारीफ करने लगीं। शिव ने पार्वती जी को बताया कि नारद बड़े ही ज्ञानी हैं। लेकिन किसी भी … Read more

महाभारत के 20 प्रमुख पात्र

महाभारत को शास्त्रों में पांचवां वेद कहा गया है। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास हैं। महर्षि वेदव्यास ने इस ग्रंथ के बारे में स्वयं कहा है- यन्नेहास्ति न कुत्रचित्। अर्थात जिस विषय की चर्चा इस ग्रंथ में नहीं की गई है, उसकी चर्चा अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं है।1. भीष्म पितामहभीष्म पितामह को … Read more

गया में पिंडदान क्यों होता है? इसका महत्व क्या है?

पितृपक्ष के प्रारंभ होते ही बिहार के गया में फल्गु नदी के तट सहित विभिन्न वेदियों पर हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं। यह परंपरा बहुत पुरानी है और माना जाता है कि पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को मुक्ति मिलती है। गया में पिंडदान का … Read more

गया में क्यों करते हैं श्राद्ध? जानिए इसके 5 प्रमुख कारण

भारत में पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा सदियों पुरानी है। हालांकि देश में कई जगहों पर पिंडदान किया जाता है, लेकिन बिहार का गया धाम इस धार्मिक अनुष्ठान का सबसे पवित्र और विशेष केंद्र माना गया है।यहाँ पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और संतान … Read more

कपूर के उपयोग एवं लाभ — संक्षेप

1. धार्मिक और पूजा में उपयोग: हिंदू पूजा में कपूर का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और वातावरण शुद्ध होता है। पूजा, हवन और आरती में कपूर का उपयोग शुभ माना जाता है। पितृदोष, कालसर्प दोष … Read more

जब माता पार्वती ने दिया शिव, विष्णु, नारद, कार्तिकेय और रावण को श्राप

एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती के साथ द्युत (जुआ) खेलने की अभिलाषा प्रकट की। खेल में भगवान शंकर अपना सब कुछ हार गए। हारने के बाद भोलेनाथ अपनी लीला को रचते हुए पत्तो के वस्त्र पहनकर गंगा के तट पर चले गए। कार्तिकेय जी को जब सारी बात पता चली, तो वह माता … Read more

भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी रुद्राक्ष की उत्पत्ति

रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से मानी जाती है। इस बारे में पुराण में एक कथा प्रचलित है। कहते हैं एक बार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर दुनिया के कल्याण के लिए सैकड़ों सालों तक तप किया। एक दिन अचानक ही उनका मन दु:खी हो गया।जब … Read more

जानिए पौराणिक काल के 24 चर्चित श्राप और उनके पीछे की कहानी

हिन्दू पौराणिक ग्रंथो में अनेको अनेक श्रापों का वर्णन मिलता है। हर श्राप के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर मिलती है। आज हम आपको हिन्दू धर्म ग्रंथो में उल्लेखित 24 ऐसे ही प्रसिद्ध श्राप और उनके पीछे की कहानी बताएँगे।1. युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्रापमहाभारत के शांति पर्व के अनुसार युद्ध समाप्त होने … Read more

भगवान शिव ने ही दिया था विष्णु को सुदर्शन चक्र

भगवान शिव व विष्णु से जुड़ी अनेक कथाएं हमारे धर्म ग्रंथों में मिलती है। ऐसी ही एक रोचक कथा कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी से भी जुड़ी है। इस दिन बैकुंठ चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु व शिव की पूजा करने का विधान है। पुराणों में इस व्रत से जुड़ी जो कथा … Read more