जब सुदर्शन चक्र के भय से भागे दुर्वासा

अम्बरीष बड़े धर्मात्मा राजा थे। उनके राज्य में बड़ी सुख शांति थी। धन, वैभव,राज्य, सुख, अधिकार, लोभ, लालच से दूर निश्चिन्त होकर वह अपना अधिकतर समय ईश्वर भक्ति में लगाते थे। अपनी सारी सम्पदा, राज्य आदि सब कुछ वे भगवान विष्णु की समझते थे। उन्हीं के नाम पर वह सबकी देखभाल करते और स्वयं भगवान … Read more

चावार्क की कहानी और उनका दर्शन

देवताओं का सर्वत्र आदर सम्मान तथा प्रतिष्ठा होती रहती थी। उन पर कभी विपत्ति पड़ने पर ब्रह्मा,विष्णु, महेश तक सहायता करते थे, यह सब देख असुरों ने सोचा कि हम भी अपने आचार-विचार देवताओं जैसे करते है, ताकि हमारी भी प्रतिष्ठा बढ़े तथा त्रय महादेव एवं त्रय महादेवियां हमारा विरोध न कर हमे सहयोग दे, … Read more

तुलसी और विष्णु की कहानी

सावर्णि मुनि की पुत्री तुलसी अपूर्व सुंदरी थी। उनकी इच्छा थी कि उनका विवाह भगवान नारायण के साथ हो। इसके लिए उन्होंने नारायण पर्वत की घाटी में स्थित बदरीवन में घोर तपस्या की। दीर्घ काल तक तपस्या के उपरांत ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और वर मांगने को कहा।तुलसी ने कहा- “सृष्टिकर्ता ब्रह्मदेव … Read more

गजेन्द्र मोक्ष की कहानी – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

अति प्राचीन काल की बात है। द्रविड़ देश में एक पाण्ड्यवंशी राजा राज्य करते थे। उनका नाम था इंद्रद्युम्न। वे भगवान की आराधना में ही अपना अधिक समय व्यतीत करते थे। यद्यपि उनके राज्य में सर्वत्र सुख-शांति थी। प्रजा प्रत्येक रीति से संतुष्ट थी तथापि राजा इंद्रद्युम्न अपना समय राजकार्य में कम ही दे पाते … Read more

जब हिरण्याक्ष का वध करने के लिए विष्णु बने वराह

एक बार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनत-सनकादि भगवान विष्णु के दर्शन करने वैकुंठ धाम पहुंचे। वैकुंठ में विष्णु धाम के द्वार पर भगवान के दो पार्षद जय-विजय द्वारपाल के रूप में बैठे थे। इन दिगम्बर साधुओं को देखकर पहले तो उन्हें हंसी आ गई, फिर पूछा- “आप लोग कौन है ? ऐसे नंग-धड़ंग यहां … Read more

यहाँ कोयल बन दर्शन दिए थे, श्री कृष्ण ने शनिदेव को

दिल्ली से 128 किमी की दूरी पर तथा मथुरा से 60 किमी की दूरी पर स्थित कोसी कला स्थान पर सूर्यपुत्र भगवान शनिदेव जी का एक अति प्राचीन मंदिर स्थापित है। इसके आसपास ही नंदगांव, बरसाना एवं श्री बांके बिहारी मंदिर स्थित है। कोकिलावन धाम का यह सुन्दर परिसर लगभग 20 एकड में फैला है। … Read more

यह है भगवान शिव कि बहन जानिए कैसे और क्यों हुई उत्पन्न?

पौराणिक कथा के अनुसार जब देवी पार्वती ने भगवान शिव से विवाह किया तो वह खुद को घर में अकेली महसूस करती थीं। उनकी इच्छा थी कि काश उनकी भी एक ननद होती जिससे उनका मन लगा रहता।भगवान शिव ने कहा मैं तुम्हें ननद तो लाकर दे दूं। लेकिन क्या ननद … Read more

श्री गणेश सहस्रनाम स्तोत्रं – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

मुनिरुवाच कथं नाम्नां सहस्रं तं गणेश उपदिष्टवान् |शिवदं तन्ममाचक्ष्व लोकानुग्रहतत्पर || 1 || ब्रह्मोवाच देवः पूर्वं पुरारातिः पुरत्रयजयोद्यमे |अनर्चनाद्गणेशस्य जातो विघ्नाकुलः किल || 2 || मनसा स विनिर्धार्य ददृशे विघ्नकारणम् |महागणपतिं भक्त्या समभ्यर्च्य यथाविधि || 3 || विघ्नप्रशमनोपायमपृच्छदपरिश्रमम् |सन्तुष्टः पूजया शम्भोर्महागणपतिः स्वयम् || 4 || सर्वविघ्नप्रशमनं सर्वकामफलप्रदम् |ततस्तस्मै स्वयं नाम्नां सहस्रमिदमब्रवीत् || 5 || अस्य … Read more

श्री शिव सहस्रनाम स्तोत्रम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

|| ॐ || स्थिरः स्थाणुः प्रभुर्भानुः प्रवरो वरदो वरः |सर्वात्मा सर्वविख्यातः सर्वः सर्वकरो भवः || 1 || जटी चर्मी शिखण्डी च सर्वाङ्गः सर्वाङ्गः सर्वभावनः |हरिश्च हरिणाक्शश्च सर्वभूतहरः प्रभुः || 2 || प्रवृत्तिश्च निवृत्तिश्च नियतः शाश्वतो ध्रुवः |श्मशानचारी भगवानः खचरो गोचरोऽर्दनः || 3 || अभिवाद्यो महाकर्मा तपस्वी भूत भावनः |उन्मत्तवेषप्रच्छन्नः सर्वलोकप्रजापतिः || 4 || महारूपो महाकायो … Read more

श्री विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

विश्वं विष्णुर्वषट्कारो भूतभव्यभवत्प्रभुः |भूतकृद्भूतभृद्भावो भूतात्मा भूतभावनः || 1 || पूतात्मा परमात्मा च मुक्तानां परमागतिः |अव्ययः पुरुषः साक्षी क्षेत्रज्ञोऽक्षर एव च || 2 || योगो योगविदां नेता प्रधान पुरुषेश्वरः |नारसिंहवपुः श्रीमान् केशवः पुरुषोत्तमः || 3 || सर्वः शर्वः शिवः स्थाणुर्भूतादिर्निधिरव्ययः |सम्भवो भावनो भर्ता प्रभवः प्रभुरीश्वरः || 4 || स्वयम्भूः शम्भुरादित्यः पुष्कराक्षो महास्वनः |अनादिनिधनो धाता विधाता धातुरुत्तमः … Read more