कैसे हुई क्षीर सरोवर की उत्पत्ति

एक समय की बात है। गोपांगनाओं से घिरे भगवान श्री कृष्ण पुष्प वृन्दावन में विहार कर रहे थे। सहसा प्रभु के मन में दूध पीने की इच्छा जाग उठी। तब भगवान ने अपने वामपार्श्व से लीलापूर्वक सुरभी गौ को प्रकट किया।बछड़े सहित वह गौ दुग्धवती थी।सुदामा ने एक रत्नमय पात्र में … Read more

कहानी राजा पृथु की – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ध्रुव के वनगमन के पश्चात उनके पुत्र उत्कल को राजसिंहासन पर बैठाया गया, लेकिन वे ज्ञानी एवम विरक्त पुरुष थे, अतः प्रजा ने उन्हें मूढ़ एवं पागल समझकर राजगद्दी से हटा दिया और उनके छोटे भाई भ्रमिपुत्र वत्सर को राजगद्दी पर बैठाया। उन्होंने तथा उनके पुत्रों ने लम्बी अवधि तक शासन किया। उनके ही वंश … Read more

श्री राम जी के पुत्र ‘लव’ और यमराज का भीषण युद्ध

एक बार राम अपनी सभा में बैठे थे कि एक सेवक ने आकर कहा — हे महाराज ! आपका वृद्ध मन्त्री सुमन्त्र स्वर्गगामी हो गया ।उसकी पत्नियाँ सती होने हेतु आपकी आज्ञा मागती हैं ।यह समाचार सुनकर श्री राम जी एक रथ पर आरुढ़ होकर सुमन्त्र के घर गये ।वहाँ पहुँच कर उन्होंने सुमन्त्र की … Read more

मोहिनी और विष्णु भक्त रुक्मांगद की कहानी

प्राचीन काल में रुक्मांगद नामक एक प्रसिद्ध सार्वभौम नरेश थे। भगवान की आराधना ही उनका जीवन था। वे चराचार जगत में अपने आराध्य भगवान हषीकेश के दर्शन करते तथा भगवान विष्णु की सेवा की भावना से ही अपने राज्य का संचालन करते थे। वे सभी प्राणियों पर क्षमा भाव रखते थे।राजा रुक्मांगद ने अपने जीवन … Read more

क्या थी कर्ण, घटोत्कच, विदुर और संजय कि अंतिम इच्छा

1. दानवीर कर्ण की अंतिम इच्छाजब कर्ण मृत्युशैया पर थे तब कृष्ण उनके पास उनके दानवीर होने की परीक्षा लेने के लिए आए। कर्ण ने कृष्ण को कहा कि उसके पास देने के लिए कुछ भी नहीं है। ऐसे में कृष्ण ने उनसे उनका सोने का दांत मांग लिया। कर्ण ने … Read more

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार मां के गर्भ से नहीं जन्मी थी राधा

धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन व्रज में श्रीकृष्ण के प्रेयसी राधा का जन्म हुआ था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधा भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं, उनका जन्म माता के गर्भ … Read more

जब एक स्त्री के देखने मात्र से काले हो गए थे युधिष्ठिर के पैरों के नाखून

शास्त्रों में महाभारत को पांचवां वेद कहा गया है। महाभारत की कथा जितनी बड़ी है, उतनी ही रोचक भी है। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास हैं। इस ग्रंथ में कुल एक लाख श्लोक हैं, इसलिए इसे शतसाहस्त्री संहिता भी कहते हैं।हम अब तक आपको महाभारत में वर्णित अनेकों कथाएं व प्रसंग बता चुके है। आज … Read more

जब सुदर्शन चक्र के भय से भागे दुर्वासा

अम्बरीष बड़े धर्मात्मा राजा थे। उनके राज्य में बड़ी सुख शांति थी। धन, वैभव,राज्य, सुख, अधिकार, लोभ, लालच से दूर निश्चिन्त होकर वह अपना अधिकतर समय ईश्वर भक्ति में लगाते थे। अपनी सारी सम्पदा, राज्य आदि सब कुछ वे भगवान विष्णु की समझते थे। उन्हीं के नाम पर वह सबकी देखभाल करते और स्वयं भगवान … Read more

चावार्क की कहानी और उनका दर्शन

देवताओं का सर्वत्र आदर सम्मान तथा प्रतिष्ठा होती रहती थी। उन पर कभी विपत्ति पड़ने पर ब्रह्मा,विष्णु, महेश तक सहायता करते थे, यह सब देख असुरों ने सोचा कि हम भी अपने आचार-विचार देवताओं जैसे करते है, ताकि हमारी भी प्रतिष्ठा बढ़े तथा त्रय महादेव एवं त्रय महादेवियां हमारा विरोध न कर हमे सहयोग दे, … Read more

तुलसी और विष्णु की कहानी

सावर्णि मुनि की पुत्री तुलसी अपूर्व सुंदरी थी। उनकी इच्छा थी कि उनका विवाह भगवान नारायण के साथ हो। इसके लिए उन्होंने नारायण पर्वत की घाटी में स्थित बदरीवन में घोर तपस्या की। दीर्घ काल तक तपस्या के उपरांत ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया और वर मांगने को कहा।तुलसी ने कहा- “सृष्टिकर्ता ब्रह्मदेव … Read more