महाभारत की ये 10 रहस्यमय विचित्र कथाएं

वेदव्यास की महाभारत को बेशक मौलिक माना जाता है, लेकिन कहते हैं कि वह 3 चरणों में लिखी गई। पहले चरण में 8,800 श्लोक, दूसरे चरण में 24 हजार और तीसरे चरण में 1 लाख श्लोक लिखे गए। वेदव्यास की महाभारत के अलावा भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे की संस्कृत महाभारत सबसे प्रामाणिक मानी जाती … Read more

मोहिनी और विष्णु भक्त रुक्मांगद की कहानी

प्राचीन काल में रुक्मांगद नामक एक प्रसिद्ध सार्वभौम नरेश थे। भगवान की आराधना ही उनका जीवन था। वे चराचार जगत में अपने आराध्य भगवान हषीकेश के दर्शन करते तथा भगवान विष्णु की सेवा की भावना से ही अपने राज्य का संचालन करते थे। वे सभी प्राणियों पर क्षमा भाव रखते थे। राजा रुक्मांगद ने अपने … Read more

पिगमेंटेशन (झाइयां) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज

अधिक देर तक धूप में रहने से सूजन की अल्ट्रावायॅलेट किरणें त्वचा को नुकसान पहुँचाती हैं। पोषक तत्वों का सेवन ना करना। इससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। केमिकल युक्त उत्पादों का त्वचा पर लम्बे समय तक प्रयोग करना। महिलाओं में यह सबसे ज्यादा हार्मोनल असंतुलन के कारण होता … Read more

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में मिलते हैं ये 11 प्रमुख श्राप

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में अनेकों अनेक वरदाना और श्रापों का वर्णन मिलता है। जहां तक श्राप का संबंध है जो हर एक के पीछे कोई कहानी और कारण मिलता है। वरदानों ने जितना घटनाक्रम को संचालित किया उससे कहीं ज्यादा श्रापों ने भविष्य में होने वाली घटनाओं को संचालित किया। आज हम आपको बताएंगे ऐसे … Read more

महाभारत के युद्ध में जब श्रीकृष्ण ने ‘हनुमान जी’ के क्रोध को किया शांत

महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ पर बैठे हनुमानजी कभी-कभी खड़े हो कर कौरवों की सेना की तरफ घूर कर देखते तो उस समय कौरवों की सेना तूफान की गति से युद्ध भूमि को छोड़ कर भाग जाती, हनुमानजी की दृष्टि का सामना करने का साहस किसी में नहीं था, उस दिन भी ऐसा … Read more

पाषाण भेद के ज़बरदस्त फायदे

पाषाणभेद मधुर, कटु, तिक्त, कषाय, शीत, लघु, स्निग्ध, तीक्ष्ण तथा त्रिदोषहर होता है। यह सारक, अश्मरी-भेदक, वस्तिशोधक तथा मूत्रविरेचक होता है। यह अर्श, गुल्म, मूत्रकृच्छ्र, अश्मरी, हृद्रोग, योनिरोग, प्रमेह, प्लीहारोग, शूल, व्रण, दाह, शिश्नशूल तथा अतिसार-नाशक होता है। इसका पौधा पूयरोधी, तिक्त तथा कषाय होता है। यह स्नायुरोग, अधरांगवात, गृध्रसी, व्रण, ग्रन्थिशोथ, विषाक्तता, कण्डु तथा … Read more

ब्राह्मण नरोत्तम की अहंकार कथा

बहुत पहले की बात है, नरोत्तम नाम का एक ब्राह्मण था। उसके घर में मां बाप थे तथापि वह उनकी परिचर्या न कर तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़ा। उसने अनेक तीर्थों में पर्यटन तथा अवगाहन किया, जिसके प्रताप से उसके गीले वस्त्र निरालम्ब आकाश में उड़ने लगे और सूखने लगे। जब उसने यों ही स्वच्छन्द … Read more

महाभारत में पराशर ऋषि के पिता को जब खा गया एक राक्षस

ऋग्वेद के मंत्रदृष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक सप्त ऋषियों में से एक महर्षि वशिष्ठ के पौत्र महान वेदज्ञ, ज्योतिषाचार्य, स्मृतिकार एवं ब्रह्मज्ञानी ऋषि पराशर के पिता का नाम शक्तिमुनि और माता का नाम अद्यश्यंती था। पराशर बाष्कल और याज्ञवल्क्य के शिष्य थे। पराशर ऋषि के पिता को राक्षस कल्माषपाद ने खा लिया था। … Read more

भीम ने द्रौपदी की 7 बार की थी मदद

भीम द्रौपदी को सबसे ज्यादा प्रेम करते थे और उन्होंने द्रौपदी का हर कदम पर साथ दिया था। साथ ही वह द्रौपदी की हर इच्छा की पूर्ति करते थे। वैसे तो भीम ने द्रौपदी की कई जगह मदद की लेकिन यहां चर्चित 7 घटना का वर्णन। भीम ने कुबेर के अद्भुत उद्यान से द्रौपदी … Read more

जानिए क्यों विराजित हुए हनुमानजी अर्जुन के रथ के छत्र पर !

धर्म ग्रंथो के अनुसार हनुमानजी और भीम भाई है क्योंकि दोनों ही पवन देवता के पुत्र है। महाभारत में एक प्रसंग आता है जब भीम और हनुमान की मुलाक़ात होती है। आज हम आपको वोही प्रसंग विस्तारपूर्वक बता रहे है। साथ ही इस प्रसंग का सम्बन्ध उस मान्यता से भी है जिसके अनुसा महाभारत युद्ध … Read more