श्री सूक्तम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥1॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥2॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥3॥ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥4॥ प्रभासां यशसा लोके देवजुष्टामुदाराम् ।पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ॥5॥ … Read more

श्री दुर्गा सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ॐ जातवेदसे सुनवाम सोम मरातीयतो निदहाति वेदः ।स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरिताऽत्यग्निः ॥ १॥ तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम् ।दुर्गां देवीꣳ शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नमः ॥ २॥ अग्ने त्वं पारया नव्यो अस्मान्थ्स्वस्तिभिरति दुर्गाणि विश्वा ।पूश्च पृथ्वी बहुला न उर्वी भवा तोकाय तनयाय शंयोः ॥ ३॥ विश्वानि नो दुर्गहा जातवेदः सिन्धुन्न … Read more

श्री लक्ष्मी सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

श्री गणेशाय नमः । ॐ पद्मानने पद्मिनि पद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि ।विश्वप्रिये विश्वमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व ॥ पद्मानने पद्मऊरु पद्माश्री पद्मसम्भवे ।तन्मे भजसिं पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम् ॥ अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने ।धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ पुत्रपौत्रं धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम् ।प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे ॥ धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्योधनं वसुः ।धनमिन्द्रो … Read more

श्री नारायण सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

सहस्र शीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशंभुवम् ।विश्वै नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम् ॥ विश्वतः परमान्नित्यं विश्वं नारायणं हरिम् ।विश्वं एव इदं पुरुषः तद्विश्वं उपजीवति ॥ पतिं विश्वस्य आत्मा ईश्वरं शाश्वतं शिवमच्युतम् ।नारायणं महाज्ञेयं विश्वात्मानं परायणम् ॥ नारायण परो ज्योतिरात्मा नारायणः परः ।नारायण परं ब्रह्म तत्त्वं नारायणः परः ।नारायण परो ध्याता ध्यानं नारायणः परः ॥ यच्च किंचित् … Read more

तुलसी संगत साधु की: चोले के प्रभाव से चोर का हृदय परिवर्तन — एक प्रेरक कथा

“एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी में पुनि आध।तुलसी संगत साधु की, हरे कोटि अपराध।” संत तुलसीदास की ये अमूल्य पंक्तियाँ हमें बताती हैं कि सद्गुरु या साधु की संगति कितनी शक्तिशाली होती है। यह न केवल जीवन को दिशा देती है, बल्कि अपराधों और विकारों से भरे जीवन को भी पूर्णतः शुद्ध कर सकती है। … Read more

जीवन को सफल बना देती हैं चाणक्य की ये 5 अनमोल बातें

आचार्य चाणक्य का नाम भारतीय इतिहास में बुद्धिमत्ता, रणनीति और नीतियों के लिए सदा अमर रहेगा। वे न केवल एक महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे, बल्कि एक कुशल मार्गदर्शक भी थे, जिन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य जैसे साधारण युवक को मौर्य साम्राज्य का सम्राट बना दिया। चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और जीवन … Read more

तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे और इन 5 चीजों से बचाव जरूरी

तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी आयुर्वेद में अमृत समान माना गया है। यह ना केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि कई रोगों से बचाव में भी मददगार है। प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार, तांबे के बर्तन में कम से कम आठ घंटे रखा गया पानी — जिसे ताम्र जल कहा जाता है … Read more

श्री विष्णु सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ॐ विष्णोर्नुकं वीर्याणि प्रवोचं यः पार्थिवानिविममे रजाꣳसि यो अस्कभायदुत्तरꣳ सधस्थंविचक्रमाणस्त्रेधोरुगायो विष्णोरराटमसि विष्णोःपृष्ठमसि विष्णोः श्नप्त्रेस्थो विष्णोस्स्यूरसिविष्णोर्ध्रुवमसि वैष्णवमसि विष्णवे त्वा॥ तदस्य प्रियमभिपाथो अश्याम्। नरो यत्र देवयवो मदन्ति।उरुक्रमस्य स हि बन्धुरित्था। विष्णोः पदे परमे मध्व उत्थ्सः।प्रतद्विष्णुस्स्तवते वीर्याय। मृगो न भीमः कुचरो गिरिष्ठाः।यस्योरुषु त्रिषु विक्रमणेषु। अधिक्षियन्ति भुवनानि विश्वा।परो मात्रया तनुवा वृधान। न ते महित्वमन्वश्नुवन्ति॥ उभे ते विद्म रजसि पृथिव्या … Read more

श्री विष्णु सुक्तम – 2

युञ्जते मन उत युञ्जते धियो विप्राछिप्रस्य बृहतोविपश्चितो-विहोत्रादधेवयुनाविदेक इन्महीदेवस्य सवितुः परिष्टुतिः स्वाहा ॥ १॥ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा निदधे पदं समूढमस्य पाँंसुरे स्वाहा ॥ २॥ इरावती धेनुमती हि भूतँं सूयबसिनीम सरसस्तोत्रसारसङ्ग्रहः नवेदशस्या ।व्यस्कब्म्नारोदसी विष्णवे ते दाधर्थपृथिवीमभितो मयूखैः स्वाहा ॥ ३॥ वेदश्रुतौ देवेष्वाघोषतम्प्राचीप्रेतमध्वरं कल्पयन्तीऊर्ध्वं यज्ञन्नयतम्माजिह्वरतमस्वङ्गोष्टमावदतन्देवीदुर्ये त्रायुर्म्मा निर्वादिष्टम्प्रजाम्मा निर्वादिष्टमत्ररमेथाम्वर्ष्मन्पृथिव्याः ॥ ४॥ विष्णोर्न्नुकं वीर्य्याणि प्रवोचं यः पार्थिवानि विममे रजाँसि योअरकभायदुत्तरँ … Read more

श्री मन्यु सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

यस्ते” मन्योऽवि’धद् वज्र सायक सह ओजः’ पुष्यति विश्व’मानुषक् |साह्याम दासमार्यं त्वया” युजा सह’स्कृतेन सह’सा सह’स्वता || 1 || मन्युरिन्द्रो” मन्युरेवास’ देवो मन्युर् होता वरु’णो जातवे”दाः |मन्युं विश’ ईलते मानु’षीर्याः पाहि नो” मन्यो तप’सा सजोषा”ः || 2 || अभी”हि मन्यो तवसस्तवी”यान् तप’सा युजा वि ज’हि शत्रू”न् |अमित्रहा वृ’त्रहा द’स्युहा च विश्वा वसून्या भ’रा त्वं नः’ || … Read more