श्री रामरक्षा स्तोत्र – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्एकैकमक्षरं पुंसां महापातक नाशनम् ध्यात्वा नीलोत्पल श्यामं रामं राजीवलोचनम्जानकी लक्ष्मणोपेतं जटामुकुट मण्डितम् सासितूण धनुर्बाण पाणिं नक्तं चरान्तकम्स्वलीलया जगत्रातु माविर्भूतमजं विभुम् रामरक्षां पठेत्प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्शिरो मे राघवः पातुफालं दशरथात्मजः कौसल्येयो दृशौपातु विश्वामित्र प्रियः शृतीघ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरत वन्दितःस्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित्मध्यं … Read more

श्री नारायण स्तोत्र – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

नारायण नारायण जय गोविन्द हरे ||नारायण नारायण जय गोपाल हरे || करुणापारावार वरुणालयगम्भीर नारायण || 1 ||घननीरदसङ्काश कृतकलिकल्मषनाशन नारायण || 2 ||यमुनातीरविहार धृतकौस्तुभमणिहार नारायण || 3 ||पीताम्बरपरिधान सुरकल्याणनिधान नारायण || 4 ||मञ्जुलगुञ्जाभूष मायामानुषवेष नारायण || 5 ||राधाधरमधुरसिक रजनीकरकुलतिलक नारायण || 6 ||मुरलीगानविनोद वेदस्तुतभूपाद नारायण || 7 ||बर्हिनिबर्हापीड नटनाटकफणिक्रीड नारायण || 8 ||वारिजभूषाभरण राजीवरुक्मिणीरमण नारायण || … Read more

श्रीलक्ष्मी स्तोत्रम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

सिंहासनगत: शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुन: ।देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां तत: ।।1।।अर्थ – इन्द्र ने स्वर्गलोक में जाकर फिर से देवराज्य पर अधिकार पाया और राजसिंहासन पर आरुढ़ हो पद्महस्ता श्रीलक्ष्मी जी की इस प्रकार स्तुति की – इन्द्र उवाच नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम्।श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्ष:स्थलस्थिताम्।।2।।अर्थ – इन्द्र बोले – सम्पूर्ण लोकों की जननी, विकसित कमल के सदृश नेत्रों … Read more

श्री धनलक्ष्मी स्तोत्रम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः।उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया ॥३॥ स सीतं सानुजं रामं सांजनेयं सहानुगम्।प्रणम्य परमानन्दं वक्ष्येऽहं स्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥ धनदं श्रद्धानानां सद्यः सुलभकारकम्।योगक्षेमकरं सत्यं सत्यमेव वचो मम ॥५॥ पठंतः पाठयंतोऽपि ब्रह्मणैरास्तिकोत्तमैः।धनलाभो भवेदाशु नाशमेति दरिद्रता ॥६॥ भूभवांशभवां भूत्यै भक्तिकल्पलतां शुभाम्।प्रार्थयत्तां यथाकामं कामधेनुस्वरूपिणीम् ॥७॥ धनदे धनदे देवि दानशीले दयाकरे।त्वं प्रसीद महेशानि! यदर्थं प्रार्थयाम्यहम् ॥८॥ धराऽमरप्रिये पुण्ये धन्ये धनदपूजिते।सुधनं र्धामिके … Read more

श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्य रत्नाकरीनिर्धूताखिल घोर पावनकरी प्रत्यक्ष माहेश्वरी |प्रालेयाचल वंश पावनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी || 1 || नाना रत्न विचित्र भूषणकरि हेमाम्बराडम्बरीमुक्ताहार विलम्बमान विलसत्-वक्षोज कुम्भान्तरी |काश्मीरागरु वासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी || 2 || योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मैक्य निष्ठाकरीचन्द्रार्कानल भासमान लहरी त्रैलोक्य रक्षाकरी |सर्वैश्वर्यकरी तपः फलकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी || 3 || कैलासाचल … Read more

श्री गजेंद्र मोक्ष स्त्रोत – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

श्री गजेंद्र मोक्ष स्त्रोत पाठ के लाभविष्णुसहस्रनाम  गजेंद्र मोक्ष स्त्रोत का पाठ करने से पित्तर दोष से मुक्ति मिलती है. जो लोग कर्ज से परेशान हैं और उनके लिये कर्ज चुकाना अत्यंत कठिन हैं उन्हें भी गजेंद्र मोक्ष के पाठ से समस्या का समाधान मिलता है। || गजेंद्र मोक्ष स्त्रोत || (हिंदी अनुवाद सहित) ओं … Read more

श्री पुरुष सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ॐ श्री गुरुभ्यो नमः हरी ॐ सहस्त्रशीर्षा पुरुष:सहस्राक्ष:सहस्रपात् |स भूमि सर्वत: स्पृत्वाSत्यतिष्ठद्द्शाङ्गुलम् ||१||जो सहस्रों सिरवाले, सहस्रों नेत्रवाले और सहस्रों चरणवाले विराट पुरुष हैं, वे सारे ब्रह्मांड को आवृत करके भी दस अंगुल शेष रहते हैं ||१|| पुरुषSएवेदं सर्व यद्भूतं यच्च भाव्यम् |उतामृतत्यस्येशानो यदन्नेनातिरोहति ||२||जो सृष्टि बन चुकी, जो बननेवाली है, यह सब विराट पुरुष ही … Read more

श्री सूक्तम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् ।चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥1॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥2॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥3॥ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।पद्मे स्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ॥4॥ प्रभासां यशसा लोके देवजुष्टामुदाराम् ।पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ॥5॥ … Read more

श्री दुर्गा सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ॐ जातवेदसे सुनवाम सोम मरातीयतो निदहाति वेदः ।स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरिताऽत्यग्निः ॥ १॥ तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम् ।दुर्गां देवीꣳ शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नमः ॥ २॥ अग्ने त्वं पारया नव्यो अस्मान्थ्स्वस्तिभिरति दुर्गाणि विश्वा ।पूश्च पृथ्वी बहुला न उर्वी भवा तोकाय तनयाय शंयोः ॥ ३॥ विश्वानि नो दुर्गहा जातवेदः सिन्धुन्न … Read more

श्री लक्ष्मी सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

श्री गणेशाय नमः । ॐ पद्मानने पद्मिनि पद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि ।विश्वप्रिये विश्वमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व ॥ पद्मानने पद्मऊरु पद्माश्री पद्मसम्भवे ।तन्मे भजसिं पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम् ॥ अश्वदायै गोदायै धनदायै महाधने ।धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे ॥ पुत्रपौत्रं धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम् ।प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे ॥ धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्योधनं वसुः ।धनमिन्द्रो … Read more