श्री नारायण सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

सहस्र शीर्षं देवं विश्वाक्षं विश्वशंभुवम् ।विश्वै नारायणं देवं अक्षरं परमं पदम् ॥ विश्वतः परमान्नित्यं विश्वं नारायणं हरिम् ।विश्वं एव इदं पुरुषः तद्विश्वं उपजीवति ॥ पतिं विश्वस्य आत्मा ईश्वरं शाश्वतं शिवमच्युतम् ।नारायणं महाज्ञेयं विश्वात्मानं परायणम् ॥ नारायण परो ज्योतिरात्मा नारायणः परः ।नारायण परं ब्रह्म तत्त्वं नारायणः परः ।नारायण परो ध्याता ध्यानं नारायणः परः ॥ यच्च किंचित् … Read more

तुलसी संगत साधु की: चोले के प्रभाव से चोर का हृदय परिवर्तन — एक प्रेरक कथा

“एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी में पुनि आध।तुलसी संगत साधु की, हरे कोटि अपराध।” संत तुलसीदास की ये अमूल्य पंक्तियाँ हमें बताती हैं कि सद्गुरु या साधु की संगति कितनी शक्तिशाली होती है। यह न केवल जीवन को दिशा देती है, बल्कि अपराधों और विकारों से भरे जीवन को भी पूर्णतः शुद्ध कर सकती है। … Read more

जीवन को सफल बना देती हैं चाणक्य की ये 5 अनमोल बातें

आचार्य चाणक्य का नाम भारतीय इतिहास में बुद्धिमत्ता, रणनीति और नीतियों के लिए सदा अमर रहेगा। वे न केवल एक महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे, बल्कि एक कुशल मार्गदर्शक भी थे, जिन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य जैसे साधारण युवक को मौर्य साम्राज्य का सम्राट बना दिया। चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और जीवन … Read more

तांबे के बर्तन में पानी पीने के फायदे और इन 5 चीजों से बचाव जरूरी

तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी आयुर्वेद में अमृत समान माना गया है। यह ना केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि कई रोगों से बचाव में भी मददगार है। प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार, तांबे के बर्तन में कम से कम आठ घंटे रखा गया पानी — जिसे ताम्र जल कहा जाता है … Read more

श्री विष्णु सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ॐ विष्णोर्नुकं वीर्याणि प्रवोचं यः पार्थिवानिविममे रजाꣳसि यो अस्कभायदुत्तरꣳ सधस्थंविचक्रमाणस्त्रेधोरुगायो विष्णोरराटमसि विष्णोःपृष्ठमसि विष्णोः श्नप्त्रेस्थो विष्णोस्स्यूरसिविष्णोर्ध्रुवमसि वैष्णवमसि विष्णवे त्वा॥ तदस्य प्रियमभिपाथो अश्याम्। नरो यत्र देवयवो मदन्ति।उरुक्रमस्य स हि बन्धुरित्था। विष्णोः पदे परमे मध्व उत्थ्सः।प्रतद्विष्णुस्स्तवते वीर्याय। मृगो न भीमः कुचरो गिरिष्ठाः।यस्योरुषु त्रिषु विक्रमणेषु। अधिक्षियन्ति भुवनानि विश्वा।परो मात्रया तनुवा वृधान। न ते महित्वमन्वश्नुवन्ति॥ उभे ते विद्म रजसि पृथिव्या … Read more

श्री विष्णु सुक्तम – 2

युञ्जते मन उत युञ्जते धियो विप्राछिप्रस्य बृहतोविपश्चितो-विहोत्रादधेवयुनाविदेक इन्महीदेवस्य सवितुः परिष्टुतिः स्वाहा ॥ १॥ इदं विष्णुर्विचक्रमे त्रेधा निदधे पदं समूढमस्य पाँंसुरे स्वाहा ॥ २॥ इरावती धेनुमती हि भूतँं सूयबसिनीम सरसस्तोत्रसारसङ्ग्रहः नवेदशस्या ।व्यस्कब्म्नारोदसी विष्णवे ते दाधर्थपृथिवीमभितो मयूखैः स्वाहा ॥ ३॥ वेदश्रुतौ देवेष्वाघोषतम्प्राचीप्रेतमध्वरं कल्पयन्तीऊर्ध्वं यज्ञन्नयतम्माजिह्वरतमस्वङ्गोष्टमावदतन्देवीदुर्ये त्रायुर्म्मा निर्वादिष्टम्प्रजाम्मा निर्वादिष्टमत्ररमेथाम्वर्ष्मन्पृथिव्याः ॥ ४॥ विष्णोर्न्नुकं वीर्य्याणि प्रवोचं यः पार्थिवानि विममे रजाँसि योअरकभायदुत्तरँ … Read more

श्री मन्यु सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

यस्ते” मन्योऽवि’धद् वज्र सायक सह ओजः’ पुष्यति विश्व’मानुषक् |साह्याम दासमार्यं त्वया” युजा सह’स्कृतेन सह’सा सह’स्वता || 1 || मन्युरिन्द्रो” मन्युरेवास’ देवो मन्युर् होता वरु’णो जातवे”दाः |मन्युं विश’ ईलते मानु’षीर्याः पाहि नो” मन्यो तप’सा सजोषा”ः || 2 || अभी”हि मन्यो तवसस्तवी”यान् तप’सा युजा वि ज’हि शत्रू”न् |अमित्रहा वृ’त्रहा द’स्युहा च विश्वा वसून्या भ’रा त्वं नः’ || … Read more

श्री मेधा सुक्तम – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

ॐ यश्छन्द’सामृषभो विश्वरू’पः | छन्दोभ्योऽध्यमृता”थ्सम्बभूव’ |स मेन्द्रो’ मेधया” स्पृणोतु | अमृत’स्य देवधार’णो भूयासम् |शरी’रं मे विच’र्षणम् | जिह्वा मे मधु’मत्तमा |कर्णा”भ्यां भूरिविश्रु’वम् | ब्रह्म’णः कोशो’ऽसि मेधया पि’हितः |श्रुतं मे’ गोपाय ||ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः’ || ॐ मेधादेवी जुषमा’णा न आगा”द्विश्वाची’ भद्रा सु’मनस्य मा’ना |त्वया जुष्टा’ नुदमा’ना दुरुक्ता”न् बृहद्व’देम विदथे’ सुवीरा”ः |त्वया जुष्ट’ ऋषिर्भ’वति देवि त्वया … Read more

श्री नक्षत्र सूक्तम् – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

अग्निर्नः’ पातु कृत्ति’काः | नक्ष’त्रं देवमि’न्द्रियम् |इदमा’सां विचक्षणम् | हविरासं जु’होतन |यस्य भान्ति’ रश्मयो यस्य’ केतवः’ | यस्येमा विश्वा भुव’नानि सर्वा” |स कृत्ति’काभिरभिसंवसा’नः | अग्निर्नो’ देवस्सु’विते द’धातु || 1 || प्रजाप’ते रोहिणीवे’तु पत्नी” | विश्वरू’पा बृहती चित्रभा’नुः |सा नो’ यज्ञस्य’ सुविते द’धातु | यथा जीवे’म शरदस्सवी’राः |रोहिणी देव्युद’गात्पुरस्ता”त् | विश्वा’ रूपाणि’ प्रतिमोद’माना |प्रजाप’तिग्^म् हविषा’ वर्धय’न्ती … Read more

श्री शिवकवच स्तोत्र – हिन्दू पंचांग ब्लॉग

|| श्री शिवकवच स्तोत्र ||महामन्त्रस्य ऋषभयोगीश्वर ऋषिः |अनुष्टुप् छन्दः |श्रीसाम्बसदाशिवो देवता |ॐ बीजम् |नमः शक्तिः |शिवायेति कीलकम् |मम साम्बसदाशिवप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः || करन्यासःॐ सदाशिवाय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः |नं गङ्गाधराय तर्जनीभ्यां नमः |मं मृत्युञ्जयाय मध्यमाभ्यां नमः | शिं शूलपाणये अनामिकाभ्यां नमः |वां पिनाकपाणये कनिष्ठिकाभ्यां नमः |यं उमापतये करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः | हृदयादि अङ्गन्यासःॐ सदाशिवाय हृदयाय नमः |नं गङ्गाधराय … Read more